سم الله الرحمن الرحيم
एक नज़र मिली थी कभी, एक नज़र से,
वो नज़र अनजान नहीं, कुछ अपनी सी नज़र आई।
ख़ुदा का इशारा था, थाम लो हाथ एक दूजे का,
आसमां पर बनी यह जोड़ी, दिल से एक आवाज़ आई।

सुन्नते रसूल से इस रिश्ते का आगाज़ हुआ है,
कितनी मुबारक घड़ी है, दूल्हे का सहरा सजा हुआ है।
गवाह बने हैं फ़रिश्ते भी इस दिलकश नज़ारे के,
ख़ुदा के फ़ज़ल से यह निकाह मुक़म्मल हुआ है।

इन्किसारी हमेशा रहे बन के इस रिश्ते का ताज,
उम्र भर साथ निभाने का किया वादा आज।
दुआओं की छाव मे हर ख़्वाब करे परवाज़
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।

दुल्हन की हया इस रिश्ते का गहना आला हो,
दूल्हे की वफ़ाओं ने जिसे अदब से सँभाला हो।
गुलों से गुलज़ार रहें रास्ते ज़िंदगी के,
हर सुबह, हर शाम राहों में चमकता उजाला हो।

नींव रखी है दिलों ने वफ़ा और अहतराम की
रंग लाएगी गहरा तासीर इनके नाम की

सोफिया की हिक्मत, फ़राज़ की बुलंदी,
यह ख़ासियत खूबसूरत घर सजाएगी ।
इंशाल्लाह ख़ानदान ऐ अंसार में इनकी दास्तां ,
अपना एक अलग ही मुक़ाम बनाएगीं ।

नज़र-ए-बद रखे फ़ासले, इस घर की दहलीज़ से,
महके कोना-कोना, बरकतों के फूल से।
ख़ुदा की रहमत बरसती रहे हर लम्हा,
खुशियों से शाद रहे उम्र का हर एक लम्हा।

ख़िराजे अक़ीदत पेश करते है
तहे दिल से रब का शुक्र अदा करते हैं,
इल्तिजा, दुआ, और मन्नतें उसकी बारगाह में यही है
सदा खुश रहे, आबाद रहे दूल्हा-दुल्हन,
बस एक यही दुआ हम बार-बार करते हैं।

रब की रज़ा हुआ इस रिश्ते का आगाज़
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।”

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