व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
रसूल-ए-ख़ुदा की, हदीस ने वाज़ेह कर दिया है.
क्या है मक़ाम, इमाम हसन का, यह बता दिया है.
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
ख़ून-ए-जंगी से, उम्मत को बचाया है हसन ने,
इस्लाम को फ़ितनों से, बचाया है हसन ने,
रिवायत-ए-दीन को ज़िंदा रखा है,
मोमिनों के लिए अपना घर भी लु टाया है हसन ने,
जन्नत के नौजवानों के, सरदार हैं हसन,
रसूल-ए-ख़ुदा की, हदीस ने वाज़ेह कर दिया है,
क्या है अज़मत इमाम हसन की, बता दिया है
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
अहले बैत का वक़ार, कुछ यूँ बुलंद रखा है.
अपनी सख़ावत को, हर चीज़ के ऊपर रखा है.
छोड़ दी खिलाफ़त, और कोई मलाल भी न था,
ख़ैर के सिवा कोई, और दिल मे ख़याल भी न था ,
ख़ैरात देने का अंदाज़, हसन से सीखो,
बादशाहत दे दी उसे, जो मुस्तहिक भी न था,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने, वाज़ेह कर दिया है,
क्या है मक़ाम इमाम हसन का, यह बता दिया है,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन







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