"मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला"
ग़दीर-ए-ख़ुम में जो गूंजा था क़ौल-ए-मुस्तफ़ा
वो ऐलान-ए-मोहब्बत ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
"मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला"
फ़हाज़ा अली उन मौला"
हिजरत की रात जान हथेली पर रख कर
सो गए रसूल अल्लाह के बिस्तर पर
वफ़ा का ये अंदाज़ ही काफी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
"मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला"
फ़हाज़ा अली उन मौला"
जो हुआ ख़ैबर के मौके पर मौजिज़ा
रोज़ कहा हुआ करते हैं
रसूल अल्लाह ने फ़रमाया
"कल अलम दूंगा हाथ में उसके
अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं"
सुबह हुई तो नाम-ए-अली रोशन हुआ
अलम अली के हाथों में ज़ाहिर हुआ
कौन है अली ये बताने को
ख़ैबर का वो मंज़र ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
"मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला"
फ़हाज़ा अली उन मौला"
"मन कुंतो मौला"
"फ़हाज़ा अली उन मौला"
04/ june/2026
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