वो है मुहाफ़िज़ मेरा, फिर किसी का ख़ौफ़ नहीं
उसके आगे ताक़तवर कोई फ़िरौन नहीं
मेरे सब्र की एक वही है दलील,
हर भरोसे की है , वही एक तकमील,
हसबुनल्लाहु वा नेमल वकील
हसबुनल्लाहु वा नेमल वकील
सजदे में सर के साथ, फ़िक्रें भी मैंने रख दीं,
हर बेचैनी अपनी , उसकी बारगाह में रख दी
मुझे दुनिया की दिलजोही से क्या लेना
हर उम्मीद आख़िरत में उसकी रज़ा पर रख दी
वही तो मालिक है उस दिन का,
वही मुन्सिफ़ क़यामत में, वही तो है वकील
हसबुनल्लाहु वा नेमल वकील
हसबुनल्लाहु वा नेमल वकील

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